Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

खास दास की आस बस, श्वाँस-श्वाँस पर वास, पार्श्व करो मत दास को, उदासता का दास। न तो सुर सुख चाहता, शिव सुख की न चाह, तव थुति सरवर में, सदा होवे मम अवगाह।।

The one hope of your devoted servant is that you dwell in every breath; O Parshva, do not make this servant a slave of despair. I desire neither the pleasures of the gods nor even the bliss of liberation — may I ever be immersed in the lake of your praise.

— आराध्य सूत्र · #1

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति