Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

दीक्षा पर्व मनाने- तप का दीपक श्रद्धा वाती ज्ञान का दीप जलाने, भक्ति भाव घी डाल-डाल कर दीक्षा पर्व मनाने। अशुभ भाव तज भक्ति करना गुरुवर की शुभ भावों से, दीक्षा का सम्बन्ध जुड़ा है मात्र भीतरी भावों से।।

To celebrate the Diksha festival: light the lamp of penance with the wick of faith and the flame of knowledge, pouring in the ghee of devotion. Abandoning impure thoughts, worship the Guru with pure feelings — for Diksha is bound only to one's inner sentiments.

— आराध्य सूत्र · #23

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति