Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

पतङ्ग की डोर जब तक हाथ में है तब तक अस्तित्व है, छूटने पर कोई ठिकाना नहीं कहाँ जा कर गिरेगी, इसी प्रकार शिष्य की डोर जब तक गुरु के हाथ में है, तब तक ही उन्नति होती है।

As long as the kite's string is in the hand it has standing; once it slips there is no telling where it will fall. So too, only as long as the disciple's string is in the Guru's hand does he keep rising.

— आराध्य सूत्र · #16

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति