Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

गुरु कुम्हार घट शिष्य है, गढ़-गढ़ काढ़े खोट। अन्दर हाथ पसार के बाहर मारे चोट।।

The guru is the potter and the disciple the pot; shaping and shaping he removes the flaws — supporting with a hand inside while striking blows from outside.

— आराध्य सूत्र · #57

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति