Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

सद्गुरु एक-एक तन्तु को ताना-बाना बुनकर वस्त्र बना देने वाले जुलाहे की तरह हैं, गुरु अनावश्यक अवगुणों को निकाल कर मूर्ति बनाने वाले शिल्पकार की तरह हैं, गुरु माटी को योग्य आकार देने वाले कुम्भकार की तरह हैं।

The true guru is like a weaver who, weaving warp and weft thread by thread, makes a cloth; like a sculptor who chisels away the useless faults to make a statue; like a potter who gives fitting shape to the clay.

— आराध्य सूत्र · #34

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति