Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

स्पर्श गुरु- जैसे मुर्गी स्पर्श करके अण्डा पकाती है वैसे ही गुरु सिर पर हाथ रख कर अठ्ठाईस मूलगुणों का आरोपण करते हैं।

The guru of touch: just as a hen hatches her egg by touch, so the guru, placing his hand on the head, bestows the twenty-eight root-virtues.

— आराध्य सूत्र · #17

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति