Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

मन्त्रे तीर्थे द्विजे देवे, दैवज्ञे भेषजे गुरौ। यादृशी भावना यस्य, सिद्धिर्भवति तादृशी।।

मन्त्र, तीर्थ, व्रती, भगवान्, ज्योतिषी, वैद्य और गुरु में जिसकी जैसी श्रद्धा होती है उसको वैसी ही सिद्धि होती है।

In mantra, pilgrimage, the vow-holder, God, the astrologer, the physician and the guru — as is one's faith, so is the attainment one receives.

— आराध्य सूत्र · #3

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति