Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

पूजा दो प्रकार की- व्यवहार पूजा- शास्त्रों की पूजा, वेष्टन (अछार) लगाना, सफाई करना, जीर्णोंद्धार करना, आदि। निश्चय पूजा- श्रुत के अर्थ को आत्मसात करना, भाव श्रुत को हृदयंगम करना, मिथ्यात्व से मुक्ति आदि।

Worship is of two kinds. Vyavahara (conventional) worship — worship of the scriptures, wrapping and dressing them, cleaning, restoring the old, and so on. Nishchaya (true) worship — assimilating the meaning of the scripture, taking the inner scripture to heart, freedom from false belief, and the like.

— आराध्य सूत्र · #3

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति