Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

मध्यलोक में सबसे ज्यादा जिनधर्म हैं और उससे कम जिनबिम्ब हैं, कृत्रिम जिनबिम्ब अधिक हैं अकृत्रिम कम हैं। मध्यलोक में 458 चैत्यालयों की प्रसिद्धि है किन्तु असंख्यात द्वीपों में असंख्यात अकृत्रिम चैत्यालय है। जैसे नन्दीश्वर भक्ति में लिखा है ''अगणित द्वीपों में अगणित हैं अगणित गुण गण मण्डित हैं''।

In the middle world Jina-dharma is most abundant, Jina-images fewer than that; artificial Jina-images are more and natural ones fewer. In the middle world 458 shrines are famed, but in the innumerable islands there are innumerable natural shrines, as written in the Nandishvara devotion: 'In countless islands are countless shrines, adorned with countless hosts of virtues.'

— आराध्य सूत्र · #19

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति