Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

नन्दीश्वर का विस्तार एक अरब, त्रेसठ करोड़, चौरासी लाख योजन है, एक दिशा में तेरह जिनालय हैं, चारों दिशाओं में बावन जिनालय हैं।

Nandishvara's extent is one arab, sixty-three crore, eighty-four lakh yojanas; in one direction there are thirteen Jinalayas, and in all four directions fifty-two Jinalayas.

— आराध्य सूत्र · #14

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति