Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

शिष्य की परीक्षा- एक शिष्य जिससे गुरु को बड़ा लगाव था, एक दिन गुरु की पत्नी ने कहा कि आपको इस शिष्य से कुछ ज्यादा ही लगाव है, बाकी अन्य शिष्यों से इतना लगाव क्यों नहीं रखते, तब गुरु ने अपनी पत्नी को बताने के लिए शिष्य की परीक्षा की और एक आम को पैर में बाँधकर फोड़ा जैसा बनाया और सब शिष्यों से कहा की यह फोड़ा चूसने पर ही ठीक होगा, ऐसा वैद्य ने कहा है, यह सुनकर बहाना बनाकर सभी शिष्य चले गये, तब वही शिष्य आया और गुरु के फोड़े को चूसने लगा, तब गुरु की पत्नी उस शिष्य को देखकर हैरान हो गयी, वह आम था, यह जानकार सारे शिष्य को बड़ी शर्मिन्दगी हुई और शिष्य की परीक्षा हो गयी कि वास्तव में उसके पास श्रद्धा, भक्ति, विनय, सेवा भाव एवं कृतज्ञता थी।

Test of a disciple: a guru was especially fond of one disciple. When his wife asked why he favoured this one over the others, the guru, to show her, tied a mango to his leg to look like a boil and told the disciples a physician had said it could only heal if sucked. Making excuses, all the disciples left, but that one disciple came and began sucking the guru's boil. The guru's wife was astonished to see him; it was a mango. Learning this, all the disciples were deeply ashamed, and the test proved the disciple truly had faith, devotion, humility, a spirit of service and gratitude.

— आराध्य सूत्र · #27

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
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