Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

स्वामिन्! सुदूरमवनम्य समुत्पतन्तो, मन्ये वदन्ति शुचयः सुरचामरौघाः। येऽस्मै नतिं विदधते मुनिपुङ्गवाय, ते नून मूर्ध्वगतयः खलु शुद्धभावाः।।

हे भगवन्! आपके लिए दुराये जाने वाले चामर झुककर ऊपर जाते हुये मानो ऐसा कहते है, की जो भगवान् को नमस्कार करता है, उसकी चामरों की तरह ऊर्ध्व गति होती है।

O Lord! The pure fly-whisks waved before you, bending low and then rising up, seem to declare: whoever bows to the Lord attains an upward destiny, just as these whisks rise.

— आराध्य सूत्र · #56

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति