Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

जिसको जिनवाणी में वात्सल्य नहीं है, विनय नहीं है, उसको यथावत् अर्थ का ज्ञान नहीं होता, विपरीत अर्थ ग्रहण करता है, मनुष्य के जीवन का आभूषण वात्सल्य है, देव-शास्त्र-गुरू और दया धर्म में वात्सल्य निर्वाण का कारण है।

One who has no affection or humility toward the Jina's word does not grasp the meaning correctly and takes the opposite sense. Vatsalya is the ornament of human life; affection toward the deva, scripture, guru and the dharma of compassion is a cause of liberation.

— आराध्य सूत्र · #34

इसी विषय के और सूत्र

सभी भक्ति →
हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति