Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

एक शची इन्द्राणि अपने जीवन में असंख्य तीर्थंङ्करों के कल्याणक मनाती है, पहली बार के प्रथम दर्शन से ही शची इन्द्राणि को सम्यग्दर्शन हो जाता है।

A single Shachi Indrani celebrates the auspicious events of innumerable Tirthankaras in her life; from the very first sight of the very first one, Shachi Indrani attains right-faith.

— आराध्य सूत्र · #43

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति