Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

जब चिन्तये तब सहस फल, लक्षा गमन करेय। होय अनन्त फल तब, जब जिनवर दर्शेय।।

When you merely contemplate Him the reward is a thousandfold; going to Him it becomes a hundred-thousandfold; but the reward becomes infinite when you truly behold the Jina.

— आराध्य सूत्र · #111

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति