Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

जन्म जरा तृषा क्षुधा, विस्मय आरत खेद, रोग शोक मद मोह भय, निद्रा चिन्ता स्वेद। राग-द्वेष अरु मरण जुत, ये अष्टादश दोष, नाहीं होत अरहन्त के सो छवि लागत मोष।।

Birth, old age, thirst, hunger, wonder, distress, weariness, disease, grief, pride, delusion, fear, sleep, anxiety, sweat, attachment, aversion and death — these eighteen faults do not exist in the Arhat, whose very image bespeaks liberation.

— आराध्य सूत्र · #104

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति