Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

ज्ञान अनन्त, अनन्त सुख, दरश अनन्त प्रमान। बल अनन्त अरिहन्त सो, इष्ट देव पहचान।।

Infinite knowledge, infinite bliss, infinite perception and infinite power — recognize such an Arihant as the true worshipful Deity (the four infinitudes).

— आराध्य सूत्र · #103

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति