Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

दश अतिशय हैं जन्म के, दश ही केवलज्ञान। चौदह होते देवकृत, अतिशय चौतिस जान।।

Ten miraculous marks (atishaya) are at birth, ten at omniscience, and fourteen are wrought by the gods — know the total miraculous marks to be thirty-four.

— आराध्य सूत्र · #100

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति