Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

सेठ की सेवा के लिए गरीब बालक तीर्थ यात्रा में गये थे, सेठ से पहले ज्वाँर के दाने चढ़ाये और भगवान् से पहले प्रार्थना की और कहा ‘भगवन् क्षमा करना हम गरीब हैं’ और आकर सो गये, सेठ ने सोचा मुझसे पहले कौन मोती चढ़ा कर गया है, पता चला बच्चों ने ज्वाँर के दाने चढ़ाये थे वे मोती बन गये तब सेठ का गर्व चूर-चूर हो गया, भक्ति के लिए सोना-चाँदी की नहीं श्रद्धा और समर्पण की आवश्यकता होती है।

Poor boys went on pilgrimage to serve a wealthy merchant; before him they offered grains of millet and prayed first, saying 'Lord, forgive us, we are poor,' and then went to sleep. The merchant wondered who had offered pearls before him — and learned the boys' millet grains had turned into pearls; his pride was shattered. Devotion needs not gold and silver but faith and surrender.

— आराध्य सूत्र · #92

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति