Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

हे जिनेन्द्र! चर्म मय नेत्र से भी आपका दर्शन होने पर वह पुण्य प्राप्त होता है, जो भविष्य में केवलज्ञान प्राप्त कराता है, फिर अन्तर्मन से दर्शन करने पर तो शीघ्र ही केवलज्ञान प्राप्त होता है।

O Jinendra! Even beholding You with these fleshly eyes earns the merit that in the future yields omniscience; then how much sooner does one attain omniscience by beholding You with the inner mind.

— आराध्य सूत्र · #90

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति