Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

देवागमनभोयान, चामरादिविभूतयः। मायाविष्वपि दृश्यन्ते, नातस्त्वमसि नो महान्।।

देवों का आगमन, आकाश में गमन, चमर आदि समवसरण की विभूति तो मायावियों में भी देखी जाती है अतः इन से नहीं किन्तु वीतरागता, सर्वज्ञता और हितोपदेशिता से भगवान् आप महान् हैं।

The coming of gods, movement through the sky, and the splendour of the samavasarana with chowries etc. are seen even among illusionists; so it is not by these but by dispassion, omniscience and beneficial teaching that You, O Lord, are great.

— आराध्य सूत्र · #75

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति