Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

त्वत्संस्तवेन भवसन्ततिसन्निबद्धं, पापं क्षणात्क्षयमुपैति शरीरभाजां। आक्रान्तलोकमलिनीलमशेषमाशु, सूर्यांशुभिन्नमिवशार्वरमन्धकारं।।

हे भगवन्! आपका स्तवन करने से अनेक भवों के पाप क्षण भर में नष्ट हो जाते हैं, जिस प्रकार रात्रि कालीन अन्धकार सूर्य की किरणों से क्षण भर में नष्ट हो जाता है।

O Lord! By singing Your praise the sins bound over countless lifetimes are destroyed in a moment, just as the darkness of night is dispelled at once by the rays of the sun.

— आराध्य सूत्र · #73

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति