Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

यदच्र्चा भावेन प्रमुदित मना दर्दुर इह, क्षणादासीत् स्वर्गी गुणगणसमृद्ध: सुखनिधि:। लभन्ते सद्भक्ता: शिव सुख समाजं किमु तदा, महावीरस्वामी नयनपथ गामी भवतु मे।।

जिन भगवान् की पूजा के भाव से मेंढक क्षण भर में ऋद्धिधारी देव हो गया, फिर सच्चे भक्त मोक्ष प्राप्त कर लें तो क्या आश्चर्य है? वे महावीर भगवान् मेरे नेत्रों के पथगामी बनें।

By the mere disposition to worship the Jina, a frog became in an instant a god endowed with powers, a treasury of bliss rich in virtues; then what wonder is it if true devotees attain the bliss of liberation? May that Lord Mahavira come within the path of my eyes.

— आराध्य सूत्र · #68

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति