Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

विषापहारं मणिमौषधानि, मन्त्रं समुद्दिश्य रसायनञ्च। भ्राम्यन्त्यहो न त्वमितिस्मरन्ति, पर्यायनामानि तवैव तानि।।

लोग विष को दूर करने के लिए मणि, मन्त्र, औषधि, रसायन आदि को ढूँढते हैं पर वे यह नहीं समझते कि हे भगवन्! वे सब आपके ही पर्यायवाची नाम हैं।

People search for gems, mantras, medicines and elixirs to remove poison, wandering about, but they do not realize — O Lord! — that all these are but synonyms of Your own name.

— आराध्य सूत्र · #66

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति