विघ्नौघा: प्रलयं यान्ति शाकिनी भूत पन्नगा:, विषं निर्विषतां याति स्तूयमाने जिनेश्वरे।।
जिनेन्द्र भगवान् के स्तवन करने से अनेक विघ्न, शाकिनी, भूत, सर्प एवं विष भी निर्विषता को प्राप्त हो जाते हैं।
When Lord Jinendra is praised, hosts of obstacles, shakinis, ghosts and serpents perish, and even poison is rendered venomless.
— आराध्य सूत्र · #64
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