Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

चेहरे पर लगी कालिख को देखकर, सबसे पहले साफ करने का भाव होता है उसी प्रकार जिनदेव रूपी दर्पण को देखकर आत्मा पर लगी कर्म-नोकर्म रुपी कालिख को छुटाने का पुरूषार्थ करना चाहिये।

On seeing the soot on one's face in a mirror, the first impulse is to wipe it clean; likewise, beholding the mirror that is Jinadeva, one should strive to remove the soot of karma and quasi-karma clinging to the soul.

— आराध्य सूत्र · #44

इसी विषय के और सूत्र

सभी भक्ति →
हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति