Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

जिनबिम्ब के गिर जाने का जो प्रायश्चित है वही प्रायश्चित अस्पृश्य मनुष्य के प्रतिमा को छू लेने पर है।

The same atonement prescribed for the falling of a Jina-image applies when an untouchable person touches the image.

— आराध्य सूत्र · जि.सं. · #42

इसी विषय के और सूत्र

सभी भक्ति →
हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति