Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

पतिते जिनबिम्बे, ऽष्टशतेन स्नापयेद् घट:। अष्टोत्तरशतं कुर्यान्, मूल मन्त्रेण चाहुती:।।

अगर प्रतिमा जी गिर जाती है तो उसी प्रतिमा का एक सौ आठ कलशों से अभिषेक एवं एक सौ आठ मन्त्रों से हवन करें।

If the sacred image falls, one should anoint that same image with one hundred and eight pitchers and perform the fire-oblation with one hundred and eight recitations of the root mantra.

— आराध्य सूत्र · जि.सं. · #41

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति