Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

नासा मुखे तथा नेत्रे, हृदये नाभि मण्डले। स्थानेषु व्यङ्गी तेष्वेषु, प्रतिमां नैव पूज्यते।।

नाक, मुख, नेत्र, हृदय, नाभि मण्डल के भग्न होने पर उस प्रतिमा की पूजा नहीं करनी चाहिये।

When the nose, mouth, eyes, heart or navel-region are broken, that image should not be worshipped.

— आराध्य सूत्र · #40

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति