Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

देवदर्शनप्रशंसा- प्रात: काल उठकर मङ्गलों के देने में समर्थ, पाप प्रणाशक, श्रेष्ठ पुण्य के हेतु तथा सुर-असुरों के द्वारा सेवित चरण-कमलों से युक्त श्री जिनेन्द्र प्रतिमा का अच्छी तरह दर्शन करना चाहिए।

In praise of beholding the Deva — Rising at dawn, one should reverently behold the image of Lord Jinendra, which is able to grant auspicious blessings, is a destroyer of sin, a cause of the highest merit, and whose lotus-feet are served by gods and demons.

— आराध्य सूत्र · #37

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति