Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

बालक ने ए.बी.सी.डी. आदि सारी वर्णमाला भगवान् को सौंप दी और कहा हे भगवन्! इन्ही शब्दों से सारी स्तुतियाँ बनती हैं, आपको जो पसन्द हो वह स्तुति आप बना लेना और हमारी भक्ति स्वीकार कर लेना, यह निश्छल भक्ति कहलाती है।

A child offered the whole alphabet — A, B, C, D and the rest — to God and said, 'O Lord! From these very letters all hymns are made; make from them whatever hymn pleases You, and accept our devotion.' This is called guileless devotion.

— आराध्य सूत्र · #29

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति