Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

हे जिनदेव! मैं निरन्तर आपकी वन्दना कर प्रणाम करता हुआ अन्य सीमित फल की याचना नहीं करता हूँ, आप में ही मेरी वह सुदृढ़ भक्ति विद्यमान रहे, जो समस्त स्वर्ग और मोक्षरूपी फल को देती है, यह वर मुझे दीजिये।

O Jinadeva! Ceaselessly worshipping and bowing to You, I do not beg for any other limited reward; grant me this boon — that firm devotion to You may ever abide in me, the devotion that yields the fruit of all heaven and of liberation.

— आराध्य सूत्र · #27

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति