Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

मन से पञ्च परमेष्ठी के गुणों में अनुराग होना भाव पूजा है एवं हाँथ जोड़ना बैठकर नमस्कार करना आदि द्रव्य पूजा है।

Heartfelt attachment to the virtues of the Five Supreme Beings is worship in disposition (bhava puja); folding the hands, sitting and bowing, and the like, is worship in substance (dravya puja).

— आराध्य सूत्र · #25

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति