Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

भक्त जन को सब विद्या सिद्ध हो जाती हैं, भक्ति के विना जो साधु खूब चरित्र पालता है उसका तप बञ्जर भूमि में बोये शाली धान के बीज के समान निष्फल है।

For the devotee all learning is accomplished; but the austerity of a saint who keeps rigorous conduct without devotion is as fruitless as rice-seed sown in barren ground.

— आराध्य सूत्र · #24

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति