Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

स्वाध्याय में अहङ्कार हो सकता है पर भक्ति व जाप में अहंकार की सम्भावना कम होती है।

In self-study there can be pride, but in devotion and recitation the possibility of pride is less.

— आराध्य सूत्र · #16

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति