Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

जिनेन्द्र भक्ति, पूजा तथा आर्षग्रन्थों का स्वाध्याय अविपाक निर्जरा का कारण तो है ही किन्तु मोक्ष का भी कारण होता है।

Devotion and worship of Jinendra and the study of the sages' scriptures are certainly a cause of premature (avipaka) shedding of karma, and also a cause of liberation.

— आराध्य सूत्र · #10

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति