Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

जिनपूजाप्रभावेन, सतीर्थेश पदं नृणां। जायते महिमोपेतं, त्रैलोक्यपतिपूजितं।।

जिन पूजा के प्रभाव से तीनों लोकों के इन्द्रों से पूजित महिमाशाली तीर्थंङ्कर पद की प्राप्ति होती है।

By the power of Jina-worship, a person attains the glorious rank of a Tirthankara, worshipped by the Indras of all three worlds.

— आराध्य सूत्र · #7

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति