Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

तुम निरखत मुझको मिली मेरी सम्पति आज। कहाँ चक्री की सम्पदा कहाँ स्वर्ग साम्राज्य।

Beholding You, today I have found my true wealth; what is the fortune of a Chakravarti, what is the empire of heaven, beside this?

— आराध्य सूत्र · #4

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति