Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

मन्दिर में दो तरह के दर्पण होते हैं काँच के दर्पण में बाहरी चेहरा दिखता है और भगवान् रूपी दर्पण में आत्मा का स्वरूप दिखाई देता है।

In a temple there are two kinds of mirror: in the glass mirror the outer face appears, while in the mirror that is God the true nature of the soul is seen.

— आराध्य सूत्र · #2

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति