Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
आहार

दिन में भोजन करने से मनुष्य उन नगरियों में ऐसे विद्याधर राजा होते हैं, जो कलाओं में निपुण हैं, जिनके शरीर, नेत्र और हृदय में स्नेह उत्पन्न करने वाले हैं, जो अमृत झराने वाली वाणी से समस्त जगत् को आह्लादित करते हैं तथा उत्साह से युक्त होते हैं, दिन में भोजन करने से मनुष्य नारायण, बलदेव, चक्रवर्ती, बिजली और लाल कमल के समान कान्ति वाले देदीप्यमान सुन्दर कुण्डलों से युक्त एवं राजाओं से सम्बन्ध करने वाले होते हैं।

By eating during the day a person becomes a vidyadhara king in those cities, skilled in the arts, whose body, eyes and heart inspire affection, who delight the whole world with nectar-raining speech and are full of zeal; and by eating by day people become like Narayana, Baladeva and the chakravarti, radiant with a lustre like lightning and the red lotus, adorned with beautiful earrings, and connected with kings.

— आराध्य सूत्र · #12

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वनमाला और लक्ष्मण का संवाद आगम सम्मत– लक्ष्मण ने कहा! ''मुझे छोड़ दो'' कार्य हो जाने पर मैं तुम्हें लेने आऊँगा, मुझे देव आदि की शपथ है, लेकिन वनमाला को उनके आने में संदेह हुआ, तब लक्ष्मण ने कहा कि, सुनो यदि मैं न आऊँ तो मुझे रात्रि भोजन का पाप लगे। (धर्म संग्रह श्राव. अधिकार-३] श्लोक २८/२९) रामचन्द्र जी को अच्छी तरह व्यवस्थित करके यदि मैं तुम्हारे पास न आऊँ तो मुझे (लक्ष्मण को) गौ हत्या, स्त्री हत्या आदि का पाप लगे। इस प्रकार अन्य शपथों के करने पर भी वनमाला ने लक्ष्मण से एक ही शपथ करायी कि आपको रात्रिभोजन का पाप लगे।
आहार
वर्षा ऋतु में जो रात्रिभोजन करता है उसकी सैकड़ों चन्द्रायण व्रतों से भी शुद्धि नहीं हो सकती है। कृष्ण पक्ष में चन्द्रमा की कला की तरह एक-एक ग्रास घटाना शुक्ल पक्ष में एक-एक ग्रास बढ़ाना इस प्रकार एक माह में एक चन्द्रायण व्रत होता है। ''सूर्य के अस्त हो जाने से हृदय और नाभि में स्थित कमल भी बंद हो जाता है इसलिए रात्रि में भोजन नहीं करना चाहिए।''
आहार
भोजन के साथ पेट में मक्खी जाने से उलटी होती है, चींटी जाने से पेशाब में जलन होती है, बाल जाने से स्वर भंग होता है, जुँआ जाने से जलोदर रोग होता है, मकड़ी जाने से कोढ़ होता है, छिपकली जाने से मृत्यु होती है इसलिए भोजन में सूर्य का प्रकाश विवेक और शोधन क्रिया आवश्यक है।
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