अस्तङ्गते दिवानाथे ह्यापोरुधिर मुच्यते। अन्नं मास समं प्रोक्तं मार्कण्डेय महर्षिणा॥
वैष्णव साधु मार्कण्डेय महर्षि ने भी कहा है कि सूर्य के अस्त हो जाने पर पानी खून कहलाता है और अन्न मांस के समान कहा गया है।
The Vaishnava sage Markandeya too has said that once the sun has set, water is called blood and food is declared to be like flesh.
— आराध्य सूत्र · #216
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