अस्तङ्गते दिवानाथे, ह्यापो रुधिरमुच्यते। अन्नं मांस समं प्रोक्तं, मार्कण्डेय महर्षिणा।।
सूर्य के अस्त हो जाने पर पानी खून कहलाता है एवं अन्न को वैष्णव मार्कण्डेय महर्षि ने मांस के समान कहा है।
When the sun has set, water is called blood, and the great sage Markandeya has declared food eaten then to be like flesh.
— आराध्य सूत्र · मार्कण्डेय महर्षि · #2
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