Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
आहार

माँस के त्यागी पुरुषों के द्वारा घुना अन्न, गोभी आदि पत्तियों का शाक, मक्खन, जमीकन्द, मूली तथा चमड़े के पात्र में रखा हुआ पानी आदि भी छोड़ा जाता है।

Those who renounce meat also give up worm-infested grain, leafy vegetables like cabbage, butter, root tubers, radish, and water kept in a leather vessel.

— आराध्य सूत्र · #10

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वनमाला और लक्ष्मण का संवाद आगम सम्मत– लक्ष्मण ने कहा! ''मुझे छोड़ दो'' कार्य हो जाने पर मैं तुम्हें लेने आऊँगा, मुझे देव आदि की शपथ है, लेकिन वनमाला को उनके आने में संदेह हुआ, तब लक्ष्मण ने कहा कि, सुनो यदि मैं न आऊँ तो मुझे रात्रि भोजन का पाप लगे। (धर्म संग्रह श्राव. अधिकार-३] श्लोक २८/२९) रामचन्द्र जी को अच्छी तरह व्यवस्थित करके यदि मैं तुम्हारे पास न आऊँ तो मुझे (लक्ष्मण को) गौ हत्या, स्त्री हत्या आदि का पाप लगे। इस प्रकार अन्य शपथों के करने पर भी वनमाला ने लक्ष्मण से एक ही शपथ करायी कि आपको रात्रिभोजन का पाप लगे।
आहार
वर्षा ऋतु में जो रात्रिभोजन करता है उसकी सैकड़ों चन्द्रायण व्रतों से भी शुद्धि नहीं हो सकती है। कृष्ण पक्ष में चन्द्रमा की कला की तरह एक-एक ग्रास घटाना शुक्ल पक्ष में एक-एक ग्रास बढ़ाना इस प्रकार एक माह में एक चन्द्रायण व्रत होता है। ''सूर्य के अस्त हो जाने से हृदय और नाभि में स्थित कमल भी बंद हो जाता है इसलिए रात्रि में भोजन नहीं करना चाहिए।''
आहार
भोजन के साथ पेट में मक्खी जाने से उलटी होती है, चींटी जाने से पेशाब में जलन होती है, बाल जाने से स्वर भंग होता है, जुँआ जाने से जलोदर रोग होता है, मकड़ी जाने से कोढ़ होता है, छिपकली जाने से मृत्यु होती है इसलिए भोजन में सूर्य का प्रकाश विवेक और शोधन क्रिया आवश्यक है।
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