यादृशं भक्षयेदन्नं तादृशी जायते मतिः। दीपोऽपि भक्ष्यते ध्वान्तं कज्जलं च प्रसूयते।।
जैसा व्यक्ति अन्न खाता है वैसी बुद्धि होती है, जैसे दीपक अन्धकार खाता है तो काजल का वमन करता है।
As is the food one eats, so becomes the mind; just as a lamp consumes darkness and gives out soot.
— आराध्य सूत्र · #21
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