Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

वीतराग ने क्या क्या देखा, तु जाने क्या वीरा रे। वीतराग की वाणी सुनकर, हर ले भव की पीरा रे।।

What all the Vitaraga saw, how would you know, O brother? Yet by hearing the words of the Vitaraga, take away the pain of worldly existence.

— आराध्य सूत्र · #5

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति