Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

जिणवयणमोसहमिणं, विसहसुहविरेयणं अमिदभूयं। जरमरणवाहिहरणं, खयकरणं सव्वदु:खाणं।।

जिनेन्द्र भगवान् के वचन विषय सुख का विरेचन करने के लिए, जरा–मरण रुपी व्याधि का क्षय करने के लिए एवं समस्त दुखों का नाश करने के लिए अमृत के समान हैं।

The words of Lord Jinendra are like nectar — to purge the pleasures of the senses, to cure the disease of old age and death, and to destroy all sorrows.

— आराध्य सूत्र · सू.पा. · #51

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति