Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

न शीतलाश् चन्दन चन्द्र रश्मयो, न गाङ्गमम्भो न च हारयष्टय:। यथा मुनेस्तेऽनघ वाक्य रश्मय:, शमाम्बु गर्भा: शिशिरा विपश्चितां।।

हे भगवन! चन्दन, चन्द्रकिरण, गङ्गा का जल और मोतियों की माला भी उतनी शीतल नहीं हैं जितने शीतल समता रूपी जल से युक्त आपके वचन हैं।

O Lord, sandalwood, moonbeams, Ganga's water, and a string of pearls are not as cooling as your words, filled with the cool water of equanimity.

— आराध्य सूत्र · #38

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति