Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

वाणी को सँभल कर बोलना चाहिए क्योंकि इस पंचमकाल में काँच का बर्तन टूटने में तो समय लगता है पर लोगों की श्रद्धा टूटने में समय नहीं लगता अत: देव-शास्त्र-गुरु पर अश्रद्धा न हो ऐसी ही चर्चा और चर्या करनी चाहिए।

Speak with care, for in this fifth era a glass vessel takes time to break but people's faith breaks in an instant; so speak and act only in ways that do not weaken faith in the Deva, Scripture and Guru.

— आराध्य सूत्र · #6501

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति