Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

देव-शास्त्र-गुरु के समक्ष नम्रीभूत मस्तक सफल है अन्यत्र नम्रीभूत मस्तक निष्फल है।

A head bowed before the deity, scripture and guru is worthwhile; a head bowed elsewhere is worthless.

— आराध्य सूत्र · #6212

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति