Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

जहाँ चैत्यालय होता है वहाँ कितने ही गुणवान मनुष्य पूजा के द्वारा प्रतिदिन पुण्य उपार्जन करते हैं, कितने ही स्तुति करते हैं कितने ही बुद्धि मान उत्तम चंदोबा, दीप, धूप, कलश, झारी तथा घंटा आदि देकर दर्शन करते हैं तथा मुनिराजों का श्रेष्ठ आश्रय भी जिनालय होता है।

Where there is a shrine, many virtuous people daily earn merit through worship; many offer praise; many wise ones give fine canopies, lamps, incense, pitchers, ewers, bells and the like and take darshan; and the Jain temple is also the finest refuge for the great monks.

— आराध्य सूत्र · #5509

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति